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21वी सदी की राजनीति नई संस्कृति की गवाह हमारी लोकसभा ( त्रिलोकनाथ )

21वी सदी की राजनीति नई संस्कृति की गवाह हमारी लोकसभा ( त्रिलोकनाथ ) 

साभार 

किंतु इस घटना के लिए जब अपने तरीके से कांग्रेस और अन्य पार्टियों के सांसदों ने बयान देने की मांग की तो मांग करने वाले सांसदों को ही निलंबित कर दिया गया इनमें से दो सांसद DMK, दो CPM और एक सांसद CPI का है. इन सांसदों का निलंबन शीतकालीन सत्र के बचे हुए दिनों के लिए हुआ है. ये सांसद हैं डीन कुरियाकोस, हिबी ईडन, एस ज्योतिमणि, रम्या हरिदास, टीएन प्रतापन, मनिकम टैगौर, बेन्नी बेहनन,मो. जावेद वीके श्रीकंदन. ये नौ सांसद कांग्रेस के हैं.किंतु भारतीय जनता पार्टी के उस सांसद प्रताप सिम्हा  को अभी तक निलंबित नहीं किया गया है जिनके सहयोग सेइन युवाओं नेसंसद केके अंदर अपनी बात को सार्वजनिक करने का काम किया हालांकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अपने सांसद पर कार्यवाही करने की बजाय इन युवाओं को आतंकवादी निरोधक कानून के जरिए कार्यवाही कर सात लोगों के खिलाफ एक्शन लिया है

 यह अपने आप में विरोधाभास कि जिनके सहयोग से इन युवाओं ने अपनी योजना को अंतिम रूप से सफलता प्रदान की उस सांसद को भाजपा पारदर्शी तरीके से बचाने का प्रयास कर रही है ..यह बीजेपी का अपना तरीका है काम करने का कि हमारा आदमी कितना भी गंदा क्यों ना हो, गलत क्यों ना हो.., वह हमारा आदमी है,और हम अपने आदमी के साथ पूरी निष्ठा से खड़े रहेंगे…भारतीय जनता पार्टी की यह कार्यशाली नई नहीं है भाजपा ने पूरी पारदर्शिता के साथ बलात्कार और यौन प्रताड़ना के आरोप को झेल रहे सांसद बृजभूषण सिंह के साथ भी पूरी निष्ठा के साथ खड़े रहे..यह अलग बात है की बृजभूषण शरण सिंह ने पूरी असभ्यता के साथ पूरी ताकत के साथ सार्वजनिक रूप से युवा महिला खिलाड़ियों की इज्जत उतारने का काम किया .भाजपा की यह रंग  21वीं सदी की राजनीति प्रदर्शित करता है की राजनीति को अगर इस प्रकार से परिपक्व नहीं किया जाएगा तो राजनीति टिक नहीं सकती,यह भी अलग बात है कि यह गलत है और पूरी तरह से गलत है इसके कोई मायने नहींहै और यह सब कुछ पूरी तरह से पारदर्शी है.

भारतीय जनता पार्टी का मानना है की चुकी वह लगातार जनता जनार्दन के वोट से जीत रही है तो इसका अर्थ यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी की यही कार्यशाली भारत के नए राजनीतिक सांस्कृतिक कार्यशाली का हिस्सा है लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है, यह लोकतंत्र पतन की शुरुआत भी कही जा सकती है..यदि हम गलत को गलत ना कहें और सही को सही ना कहें बल्कि सिलेक्टिव तरीके से विषयों में अपना और परायापन देखें तो हो सकता है सत्ता में बना रहा जा सकता है किंतु अयोध्या में आगामी 22 जनवरी को राममंदिर लोकार्पित किया जा रहा है उस मंदिर की केंद्र का राम भारत की आध्यात्मिक सत्ता का विरासत है जिसने मर्यादाओं को अपने जीवन में सार्वजनिक तौर पर स्वीकारने का निर्देश दिया था और संपूर्ण भारत की सनातन-विरासत की परंपरा यही है कि हम गलत को गलत औरसही को सही ठहराए…..

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