Breaking News

जागृत युवा आदिवासी कार्यकर्ता को झुटे केस में फंसाकर जिला बदर करने की धमकी का आरोप ॽ

जागृत युवा आदिवासी कार्यकर्ता को जुटे केस में जिला बदर करने की धमकी का आरोप ॽ

हेमराज बौद्ध द्वारा :-

*जागृत आदिवासी दलित संगठन पर फिर हमला : युवा आदिवासी कार्यकर्ता, अंतराम अवासे को ज़िला बदर का नोटिस*
_अंतराम भाई वन अधिकार कानून के सही क्रियान्वयन के लिए अभियान में, सरकारी मिलीभगत से हुए हजारों एकड़ के वन कटाई के खिलाफ सबसे ज़्यादा सक्रिय रहे हैं ।_

*_अप्रैल में उन्हें झूठे केस में गिरफ्तार किया गया था पर जब उनका या संगठन का हिम्मत नहीं टूटा तो मप्र सरकार ने संगठन के खिलाफ मुहिम चलाया, कई कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया और अब अंतराम भाई को ज़िला बदर करने की तैयारी है। संभवतः नवंबर-दिसम्बर में होने वाले चुनाव के बाद और हमले होंगे!_*

अंतराम अवासे एक 32 वर्षीय आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता है । उनका परिवार 1980 के पूर्व से बुरहानपुर के धाबाबवड़ी (सिवल) गाँव के जंगल में खेती और मजदूरी कर अपना गुज़ारा करते आएँ हैं । वनों में खेती कर रहे अन्य आदिवासियों की तरह उनके गाँव और परिवार को भी सालों तक भयानक हिंसा, प्रताड़ना और दमन का सामना करते रहें हैं । अंतराम भाई जब पाँचवीं कक्षा में थे, तब वन विभाग ने उनके गाँव के आदिवासियों की फसलों को नष्ट कर दिया था, उनके मवेशियों को वन विभाग और बड़े किसानों ने मिल कर लूटा और उनके मोहल्ले को जला दिया था ।

इस घटना के बाद अंतराम भाई को पढ़ाई छोडनी पड़ी और वे अपने परिवार की मदद के लिए मजदूरी करने लगे । लेकिन शिक्षा के लिए तरसते रहे और खुद से पढ़कर उन्होंने ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा भी दी । परंतु पूरी परीक्षा देने के बावजूद, एक पेपर में उन्हें एबसेंट मार्क किया गया और उन्हें पास नहीं किया गया । इस गलती को सुधारने या आगे पढ़ने के लिये वे सक्षम नहीं थे । इस बीच सिवल गाँव के आदिवासी परिवार लगातार वन विभाग की मार और दमन झेलते हुए खेती करने की कोशिश करते रहे। वन अधिकार कानून पारित होने के बाद भी उन्हें अपने ही खेतों में “अतिक्रमणकारी” बताया जाता रहा है ।
2018 में इस क्षेत्र में संगठन शुरू होने पर अंतराम भाई उसमें जुड़ गए और पीढ़ियों से चले आ रही वन विभाग की लूट, अत्याचार और दमन पर रोक लगाने के लिए वन अधिकार कानून को ज़मीन पर उतारने के लिए अभियान में सक्रिय हो गए । 2019 में उनके गाँव के आदिवासियों को अवैध रूप से बेदखल करने के प्रयास को गाँव वालों ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए विरोध किया तो वन विभाग ने उन पर गोली चलायी और 4 आदिवासियों को घायल किया । इस हिंसा के खिलाफ संगठन द्वारा किए व्यापक आंदोलन पर मप्र सरकार ने डीएफ़ओ सहित अन्य वन कर्मियों पर आंशिक कार्यवाही की, जिसके बाद से वन विभाग लगातार अंतराम भाई और उनके साथियों के खिलाफ द्वेष बना है ।

अंतराम भाई और उनके साथियों के प्रयास से वन विभाग के हिंसा, दमन और भ्रष्टाचार पर काफी अंकुश लगा है जिस कारण वनकर्मी संगठन के प्रति खास दुर्भावना रखते ही हैं । इसके ऊपर, संगठन ने 15000 एकड़ में खुले आम अवैध वन कटाई में सरकारी मिलीभगत को भी सार्वजनिक रूप से ललकारा और उसके खिलाफ आंदोलन किया । जिस पर न सिर्फ वन विभाग, बल्कि म.प्र सरकार और प्रशासन ने भी संगठन पर दमन शुरू कर दिया । अंतराम अवासे, दिलीप सिसोदिया और नितिन को मन गढ़ित केसों में गिरफ्तार किया गया, माधुरी बेन को ज़िला बदर किया, कई अन्य कार्यकर्ताओं को पुराने केसों में उलझा दिए और अखबारों में पुलिस अधीक्षक कई ऊलजलूल मनगढ़ित आरोप छपवाने लगे । अब, विधान सभा चुनाव के ठीक पहले अंतराम भाई को ज़िला बदर करने की धमकी!

Check Also

वन विभाग ने40 आदिवासी परिवारों के घरों पर चलाई जेसीबी मशीन किया बेघर।

🔊 इस खबर को सुने Kaliram 40 आदिवासी परिवारों के घरों पर चलाई जेसीबी मशीन, …