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दशहरा अशोका विजय दशमी धम्म प्रवर्तन दिन है सभी का मंगल हो

दशहरा अशोका विजय दशमी बुद्ध प्रवर्तन दिन है सबका मंगल हो।

हमारे देश में सालों से दसवें दूर्गा विसर्जन दिन रावण मेघनाद के पुतले जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत उत्सव दशहरे का नाम के रूप में मनाया जाता है इस दिन हिन्दूराष्ट्रवादी लोग अस्त्र-शस्त्रो का पुजन भी करते हैं। यह इतिहासिक है कि दशहरा वास्तविक अशोका विजय दिवस है कालिंग युद्ध जीतने के बाद सम्राट अशोक ने हथियारों का त्याग कर अहिंसा का मार्ग बौद्ध धम्म की दीक्षा लेकर अपनाया था। चन्द्रगुप्त मौर्य से लेकर मौर्य वंश का अंतिम  वृहदथ दसवां सम्राट था जिसकी हत्या ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर शुंग राजवंश की स्थापना की थी। मौर्य साम्राज्य के दसवें सम्राट का अंत किया था। ब्राह्मण कुल के लोग जीत के रूप में इस दिन अशोक नाम नदारद करके सम्राटों के सर के पुतले बनाकर जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत उत्सव मनाया जाता है। और देश की आजादी के बाद यह दिन दशहरा अशोका विजय दिवस महत्वपूर्ण इस लिए हो जाता है कि 14 अक्टूबर 1956 बाबा साहेब आंबेडकर ने अपने पांच लाख अनुयायियों की उपस्थिति में बौद्ध धम्म की दीक्षा ली और अपने अनुयायियों को 22प्रतिज्ञाओ के साथ थी। तब से प्रतिवर्ष आम्बेडकर बुद्ध अनुयाई इस दशहरे के दिन को धम्म प्रवर्तन के रूप में मनाते है।

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